पटन देवी मंदिर पटना, Patan Devi Mandir Patna Bihar

  

पटन देवी, जिन्हे माँ पटनेश्वरी भी कहा जाता है का मंदिर पटना में स्थित सबसे पुराने और पवित्र मंदिरों में से एक है। इस मंदिर को भारत में स्थित 51 सिद्ध शक्ति पीठों में से एक माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती पर वार किया था को उनके शव की “दाहिनी जांघ” यहाँ गिरी गयी थी। वास्तविक तौर पर इस प्राचीन मंदिर को माँ सर्वानंद कारी पटनेश्वरी कहा जाता है, जिसे देवी दुर्गा का निवास्थान माना जाता है।

पटना शहर का नाम व्युत्पत्ति बड़ी पटन देवी मंदिर के नाम से हुई थी। परंतु कुछ का मानना यह है की पटना का नाम इस मंदिर के कारण पड़ा। उनके मुताबिक, ये नाम पटन से उत्पन्न हुआ है जिसका अर्थ है “शहर” और पटना आयत और निर्यात का बड़ा स्थान है।

Shri Patna Deviइतिहास :

पौराणिक कथा :-

हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार, कहा जाता है की देवी सती की दाहिनी जांघ मगध में गिर गई थी और सती के शरीर के अन्य भाग महाराजा गंज और पटना के पुराने शहर के चौक क्षेत्र में गिरे थे। इन स्थानों पर बड़ी पटन देवी मंदिर और छोटी पटन देवी मंदिर का निर्माण करवा दिया गया। तंत्र चारु मणि के अनुसार, बड़ी पटन देवी मंदिर (पटना) में देवी महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की छोटी छोटी तस्वीरें है। हिन्दू पौराणिक कथाओं में लिखा गया है की, इन देविओं ने पुत्रका की रक्षा की थी, जो पाटलिपुत्र के संस्थापक थे। पटना के बड़ी पटन देवी मंदिर के निकट स्थित एक टैंक में पत्थर की एक अजीब तस्वीर पाई गयी थी। इस तस्वीर को मुख्य मंदिर के पूर्वी वरामदे में रख गया है जहां इस मूर्ति की निरन्तर पूजा की जाती है।

Badi Patan Deviबड़ी पटन देवी :-

बड़ी पटन देवी (पटना) का मंदिर का मुख्य गंगा नदी के तरफ उत्तर में है। मंदिर की सभी मूर्तियों का निर्माण काले पत्थर से किया गया है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर एक बरामदा है जिसकी डाइमेंशन्स 1.5′ x 15′ है। इसके पश्चात 8′ x 8′ के कक्ष है जिन्हे निम्न भगवानो के लिए बनाया गया है – महाकाली (12″), महा लक्ष्मी (6″), महा सरस्वती (12″), और भैरव (3″)। देवी देवतओं की सभी मूर्तियों को सिंहासन पर बैठाया गया है जो क्रास सेक्शन के लगभग 4 square का है और इसकी ऊँचाई 7 feet है। पहली तीन देविओं ने साड़िया पहन रखी है।

भक्त मंदिर में दिन में किसी भी समय मंदिर में प्रवेश कर सकते है। ये मंदिर किसी भी जाती और पंथ के बीच भेद नहीं करता है इसलिए ये मंदिर सभी धर्म और जातियों के लिए खुला है। बड़ी पटन देवी का मंदिर प्रातः 6 am बजे से रात्रि 10 pm बजे तक खुला रहता है। मंगलवार भक्तो के लिए एक विशेष दीन्हि और इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में दर्शन करने आते है। आने वाले भक्त देवी से मन्नत मांगते है और उसके पूर्ण हो जाने पर भक्त मंदिर में उपहार और साड़िया देते है।

Patan Devi Mandirछोटी पटन देवी :-

ये मंदिर पटना शहर के चौक क्षेत्र में स्थित है और एक समय में इसे पत्नी की मुख्य इष्ट देवी भी माना जाने लगा था। कई वर्षो के बाद ये स्थान बड़ी पटन देवी ने ले लिए, जो शहर की इष्ट देवी है और छोटी पटन देवी को दूसरा स्थान मिला। “छोटी” का विशेषनाम होने के कारण ये भी बड़ी पटन देवी (पटना) की तरह मशहूर हो गयी। परंतु एक इतिहासकार जिन्हे बुकानन कहा जाता था ने बहुत ही विशिष्ट से ये बताया है की मंदिर (छोटी पटनदेवी) को 18 वीं और 19 वीं शताब्दी के दौरान शहर की इष्टदेवी के रूप में माना जाता था।

वर्तमान मंदिर किसी भी महान पुरातनता का प्रतीक नहीं है। मंदिर के भीतर मौजूद तस्वीरें, यदि बुकानन की माने तो मुग़ल शासक अकबर के मशहूर सेनापति मान सिंह ने स्थापित करवाई थी। इस मंदिर में ब्राह्मण तस्वीरें जिनमे गणेश, विष्णु ओर सूर्य की तस्वीरें शामिल है आज भी मौजूद है। मंदिर के अलावा, इसके परिसर के भीतर दरवाजव, खम्बे और तस्वीरो के समूह अभी भी मौजूद है। इनमे से सबसे प्रभाव शाली तस्वीर सूरज की है परन्तु वो टूटी हुई है। कई इतिहासकारो के मुताबिक, ये उन मध्ययुगीन मंदिरों में से एक है जिनके निर्माण 9th-11th Century A.D. के दौरान हुआ था और इनकी मूर्तिकला/वास्तुकला अवशेष के केवल खंडहर बचे है। ऐसा माना जाता है की इनको राजा मान सिंह ने 16th-17th शताब्दी के दौरान बनाए गए नए मंदिर में पुनर्स्थापित किया गया था। परन्तु इस जानकारी का कोई प्रमाण नहीं है।

Durga Puja festivalमहत्वपूर्ण त्यौहार :

बाकी सभी मंदिरों की तरह, विजयदशमी के दौरान इस मंदिर के पास में मेले का आयोजन किया जाता है। दुर्गा पूजा की सप्तमी, अष्टमी और नवमी के दौरान आयोजित किये जाने वाले मेले में लगभग 600 से ज्यादा व्यक्ति इन दोनों मंदिरों में प्रतिदिन पूजा करने आते है। आने वाले भक्त मिठाइयां, फूलों के हार और फल आदि लेकर मंदिर में आते है और देवताओ को अर्पित करते है। मंदिर के पुजारी इसमें से कुछ मात्रा अपने पास रखते है और बाकी भक्तो को वापस कर देते है। पुजारी भक्तो के माथे पर रोली (लाल पाउडर) से तिलक लगते है। इसके बाद भक्त पुजारी को अपनी श्रद्धा के मुताबिक कुछ रूपए दक्षिणा के रूप में देते है।

अनुष्ठान की दिनचर्या के मुताबिक, देवताओ की मूर्तियों को सुबह और शाम स्नान कराया जाता है और उन्हें प्रसाद (फल और मिठाइयां आदि) अर्पित किया जाता है। इसके पश्चात सामान्य पढ़ी जाने वाली आरती के साथ घंटिया बजायी जाती है और उनकी पूजा की जाती है।

Patan Devi Templeपहुंच :

इस स्थान तक पटना बस स्टेशन से आसानी से पंहुचा जा सकता है। ये मंदिर पटना जंक्शन रेलवे स्टेशन से लगभग 10 km की दुरी पर स्थित है। यहाँ पहुंचने के लिए पटना, गुलजारबाग और पटना शहर रेलवे स्टेशन से रिक्शा, टैक्सी आदि की सुविधा उपलब्ध है।
Title : Patan Devi Mandir Patna Bihar

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