रक्षाबंधन पर चंद्रग्रहण क्या शुभ क्या अशुभ? 2017 का रक्षाबंधन




रक्षाबंधन पर चंद्रग्रहण

रक्षा बंधन भाई बहन के पवित्र त्योहारों में से एक है जिसे पुरे भारत वर्ष में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। रक्षा बंधन श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है जिसमे बहने अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसकी लम्बी उम्र की कामना करती है जिसके बदले भाई उसकी जीवन भर रक्षा करने का वचन देता है।

वर्ष 2017 में श्रावण मास की शुक्ल पूर्णिमा पर बेहद खास संयोग के साथ रक्षा बंधन 7 अगस्त यानी सावन के आखिरी सोमवार को पड़ रहा है। इस बार रक्षाबंधन पर खंडग्रास चंद्रग्रहण का योग भी बन रहा है।

रक्षा बंधन के पवन अवसर पर चंद्रग्रहण और भद्रा के योग को देखते हुए सभी लोगों के मन में यही विचार है की श्रावणी उपाकर्म कब किया जाए तथा बहने अपने भाई को राखी कब बांधे? इसीलिए हम आपको ग्रहण से जुडी एक एक जानकारी देने जा रहे है। हम आपको बताएंगे किस मुहूर्त में राखी बांधना शुभ होगा।

भद्रा की समाप्ति और चंद्र ग्रहण का सूतक लगने के बीच के समय में ही रक्षाबंधन, श्रावणी उपाकर्म और श्रवण पूजन आदि करना शुभ रहेगा।

चंद्रग्रहण का समय :chandra grahan

वर्ष 2017 में खंडग्रास चंद्र ग्रहण 7 अगस्त की रात्रि 10 बजकर 40 मिनट से शुरू होगा। इसका मध्य काल 11 बजकर 39 मिनट पर होगा जबकि मोक्ष मध्यरात्रि में 12 बजकर 35 मिनट पर होगा। ग्रहण की कुल अवधि 1 घंटा 55 मिनट होगी। 

ग्रहण का सूतक काल 7 अगस्त की दोपहर 1:40 PM मिनट से प्रारंभ हो जाएगा। भद्रा 7अगस्त को दोपहर 11.29 बजे तक रहेगी। ऐसे में रक्षाबंधन, श्रावणी उपाकर्म और श्रवण पूजन आदि प्रातः 11.30 से दोपहर 1.39 के मध्य संपन्न करना उचित रहेगा। शुभ कार्यों के लिए ये समय सबसे उचित है।

ग्रहण प्रारंभ : रात्रि 10.40 बजे

चंद्र ग्रहण का मध्य : रात्रि 11.39 बजे

ग्रहण का मोक्ष : रात्रि 12.35 बजे

चंद्र ग्रहण की कुल अवधि : 1 घंटा 55 मिनट

शुभ कार्य करने के लिए उचित समय : प्रातः 11.30 मिनट से दोपहर 1:39 बजे 

ग्रहण में ये कार्य है वर्जित :-

शास्त्रों में ग्रहण काल के दौरान कुछ कार्यों को न करने के निर्देश दिए गए हैं। वे काम हैं ग्रहण काल में भोजन न करें। इस समय गर्भवती स्त्रियां बाहर न निकलें, उन पर चंद्र की छाया बिलकुल न पड़े। सहवास न करें, झूठ न बोलें, निद्रा का त्याग करें, चोरी न करें। किसी भी प्रकार के पाप कर्म से दूर रहें और ग्रहण काल में शिव या गायत्री मंत्र का जाप करते रहें।

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